उत्तराखंड में बदलते मौसम ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। चिंता की बात है मरीजों की संख्या में इजाफा लगातार इजाफा हो रहा है। जहां डेंगू लगातार बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है, वहीं अब बच्चों में एलर्जी की परेशानी भी बढ़ती दिखाई दे रही है।
डॉ.सुशीला तिवारी अस्पताल में हर रोज 15 से 20 बच्चे ऐसे पहुंच रहे हैं जिन्हें एलर्जी की समस्या हो रही है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि एलर्जी की समस्या डेंगू के मरीज रह चुके बच्चों में है या नहीं। एसटीएच के पेड्रियाट्रिक विभाग की एचओडी डॉ. रितु रखोलिया बताती हैं कि पिछले सप्ताह से एलर्जेटिक बीमारी से परेशान बच्चे ज्यादा पहुंच रहे हैं। इनमें स्किन, नाक और बाल दमा की दिक्कतें दिखाई दे रही हैं।
ज्यादातर बच्चे 10 साल से कम उम्र के पहुंच रहे हैं। स्किन एलर्जी की समस्या वाले 3 से 5 वर्ष, नाक की एलर्जी 6 से 8 आयुवर्ष और बाल दमा की दिक्कत अधिकतर 8 से 12 आयु वर्ष के बच्चों में सामने आ रही है।स्किन एलर्जी में शरीर पर दाने भी पड़ रहे हैं। विभागाध्यक्ष ने कहा कि एलर्जी का कारण मौसम में बदलाव भी हो सकता है। वहीं बाल दमा कुछ बच्चों का जेनेटिक है तो कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें सर्दी-खांसी से यह परेशानी हो रही है।
ये उपाय अपनाएं
बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए मौसम के मुताबिक पूरे कपड़े पहनाएं। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बच्चे को सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। बच्चों को बाहरी विशेष रूप से तली हुई चीजें खाने से रोकें। पौष्टिकता पर पूरा ध्यान दिया जाना जरूरी है। धूल वाले स्थानों पर बच्चों को कम से कम जाने दें।
