निवेश के नाम पर गरीब और मध्यम वर्ग को लोकलुभावनी स्कीम का झांसा देकर ठगी के मकसद से खोले जाने वाली चिटफंड कंपनियों पर अब शिकंजा कसा जाएगा। चिटफंड कंपनियों के नाम पर कई बार बाहरी प्रदेशों से लोग आकर उत्तराखंड में ठगी करते आए हैं।इसके खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई ठोस नियमावली न होने के चलते अधिकांश मामलों में रिकवरी नहीं हो पाती है। हालांकि, कई ऐसे मामलों में शिकायत पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर ऐसी कंपनियों के निदेशकों को आरोपी बनाती रही है।
वहीं अब ऐसे मामलों में पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए सरकार ने पहल की है। ठगी करने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई को नियमावली बना दी गई है। सचिव वित्त के आदेश पर सभी जिलों के जिलाधिकारियों को इसके लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। चिट फंड को सोसायटी, चिट और फर्म के रजिस्ट्रार के साथ रजिस्टर्ड किया जा सकता है। प्रदेश में नैनीताल और देहरादून में चिटफंड कंपनियों को रजिस्टर्ड करने की व्यवस्था है। वहीं अन्य जिलों में मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय में चिटफंड कंपनियों को रजिस्टर्ड किया जाता है।
नई नियमावली के मुताबिक, चिटफंड कंपनी के नाम पर ठगी का शिकार बनने वाले निवेशक ऐसे मामलों में जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत कर सकेंगे। डीएम को नियमावली के तहत चिटफंड कंपनी की संपत्ति के जब्तीकरण या कुर्क कर इसे नीलाम करने का अधिकार दिया गया है।हालांकि, ऐसे मामलों में शिकायर्ता को ठगी करने वाली ऐसी चिटफंड कंपनी के दूसरे कार्यालयों या संपत्ति का ब्यौरा देना होगा। इसके बाद से डीएम स्तर से नोटिस और नोटिस के बाद भी रकम न देने पर आगे संपत्ति जब्तीकरण या कुर्की की कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।
ठगी करने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ शिकायतकर्ता डीएम कार्यालय में शिकायत करा पाएगा। नई नियमावली के तहत डीएम को ऐसे मामलों में नोटिस और रिकवरी की कार्रवाई का अधिकार दिया है। इसके लिए शिकायतकर्ता को ठगी कर भागी संबंधित चिटफंड कंपनी के अन्य कार्यालयों या निदेशकों के बारे में जानकारी देनी होगी, जिससे नोटिस भेजकर रिकवरी की जा सके।
