देहरादून, ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आजादी के अमृत महोत्सव के तहत ’उज्ज्वल भारत उज्ज्वल भविष्य-पावर 2047’ के समापन समारोह कार्यक्रम में पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना का शुभारंभ किया। एनटीपीसी की विभिन्न हरित ऊर्जा परियोजनाओं का शिलान्यास तथा लोकार्पण एवं नेशनल रूफटॉप सोलर पोर्टल को भी प्रधानमंत्री द्वारा लांच किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में इस कार्यक्रम में वर्चुअल प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी जुड़े थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते आठ वर्षों में देश का मान-सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ा है। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न क्षेत्रों में अनेक नए कार्यों की शुरुआत हुई है। एक नई कार्य संस्कृति देश में आई है। कोरोना काल में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई थी, ऐसे समय में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोरोना पर पूरी तरीके से नियंत्रण किया। भारत ने 02 स्वदेशी कोविड वैक्सीन तैयार की। अन्य देशों को भी भारत ने 20 करोड़ से अधिक वैक्सीन दी। भारत में कोविड की 200 करोड़ से अधिक वैक्सीन लगाई जा चुकी है। बूस्टर डोज का अभियान भी तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उत्तराखंड में भी कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। राज्य गठन के समय ऊर्जा और पर्यटन राज्य निर्माण की मूल अवधारणा में शामिल था। जिसको लेकर राज्य सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा 2025 तक प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए सबकी सहभागिता जरूरी है। हाल ही राज्य में बिजली का संकट था, सरकार ने महंगी बिजली खरीद कर लोगों की बिजली आपूर्ति पूरी की गई। इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक सविता कपूर, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, एमडी यूपीसीएल अनिल कुमार उपस्थित थे।
देहरादून, ब्यूरो। कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) एक अखिल भारतीय नेटवर्क है जो सरकार के उद्देश्य के अनुसार समाज को वित्तीय, सामाजिक एवं डिजिटल रूप से समावेशी बना रहा है। डिजिटल इंडिया” मिशन में योगदान देने के लिए, सीएससी और शुगरबॉक्स नेटवर्क ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए साझेदारी की है। हाल की रिपोर्टों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि दुनिया की एक तिहाई से अधिक आबादी अभी भी डिजिटल रूप से अनभिज्ञ है, और खासकर ग्रामीण क्षेत्र इससे बड़े पैमाने पर प्रभावित हैं। फिर असली सवाल यह है कि मौजूदा डिजिटल डिवाइड को समाप्त करने के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सक्षम बनाया जाए। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, डिजिटल सेवाओं और उपलब्ध सामग्री के बारे में बहुत कम जागरूकता, स्थानीय भाषाओं में या व्यावसायिक रूप से लाभप्रद (प्रदाताओं के लिए) सेवाओं की अनुपलब्धता को अक्सर मौजूदा डिजिटल डिवाइड के सामान्य कारण के रूप में उद्धृत किया जाता है। इस प्रकार, सतत विकास के मौलिक सक्षमकर्ता के लिए अल्पसेवित और सेवा-वंचित क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता इस अंतर को समाप्त करने के लिए आवश्यक है। मौजूदा इकोसिस्टम (और इन्फ्रास्ट्रक्चर) का उपयोग करते हुए अल्प-सेवित या सेवावंचित क्षेत्रों के लोगों के लिए ऐसा प्लेटफॉर्म डिजाइन किया जाएगा जिससे डिजिटल समाधान सुलभ हो सकें और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, वित्तीय सेवाओं, बुनियादी कृषि-प्रौद्योगिकी और शिक्षा को समावेशी बनाया जा सके। और यही वह समाधान है जिसकी कल्पना डॉ. दिनेश त्यागी, प्रबंध निदेशक, सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड ने की थी। आज, किसी दूरस्थ क्षेत्र या किसी ऐसे क्षेत्र जहाँ नेटवर्क कनेक्शन नहीं है या फिर यह विश्वसनीय रूप में उपलब्ध नहीं है, वहाँ के वंचित उपयोगकर्ता नेटिव डिजिटल कंटेंट व सेवाओं को ऐसे एक्सेस कर सकते हैं, मानो वो डिजिटल रूप से कनेक्टेड क्षेत्र में रह रहे हों। यह अनूठा नवाचार वर्तमान में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में 100 ग्राम पंचायतों में पेटेंटेड हाइपरलोकल एज क्लाउड टेक्नोलॉजी समाधान के एप्लिकेशन के जरिए उपलब्ध है, जिसके बारे में डॉ. दिनेश त्यागी का मानना था कि यह उपयुक्त डिजिटल भविष्य की दिशा में प्रारंभिक प्रयास होगा। शुगरबॉक्स नेटवक्र्स द्वारा पेश किया गया समाधान ग्रामीणों को शिक्षा, डी2सी ई-कॉमर्स, ओटीटी जैसी श्रेणियों के साथ-साथ ई-वॉलेट जैसी सेवाओं के अंतर्गत डिजिटल सामग्री के उपयोग की पेशकश कर रहा है, जिसमें निकट भविष्य में किसी भी उद्योग या व्यवसाय तक पहुंच बढ़ाने की क्षमता है। सीएससी और शुगरबॉक्स नेटवर्क की साझेदारी का उद्देश्य शून्य डेटा लागत पर ग्राम पंचायतों में डिजिटल जानकारी तक पहुंच को सक्षम करना है।