कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों में अतिवृष्टि से ऊर्जा निगम के कोटद्वार खंड को करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। यहां तक कि नगर निगम कोटद्वार क्षेत्र में ही करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि, निगम की ओर से अतिवृष्टि से हुए नुकसान का आंकलन अभी जारी है।
कोटद्वार में अतिवृष्टि से बर्बादी
बीते अगस्त माह में कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों में अतिवृष्टि से काफी बर्बादी हुई। आठ और 14 अगस्त की रात हुई अतिवृष्टि ने कइयों के सिर से छत तक छीन ली। इतना ही नहीं जल संस्थान का गाड़ीघाट स्थित एक ट्यूबवेल भी नदी की भेंट चढ़ गया। इस आपदा में ऊर्जा निगम के कोटद्वार खंड को भी काफी नुकसान पहुंचा।
कोटद्वार खंड के अंतर्गत आने वाले कोटद्वार नगर निगम, दुगड्डा ब्लाक, जयहरीखाल ब्लाक और यमकेश्वर ब्लाक प्रखंड में अभी तक ऊर्जा निगम को तीन करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। दरअसल, अतिवृष्टि के कारण जगह-जगह हुए भूस्खलन व नदियों के उफान पर आने से कई जगह विद्युत लाइनों समेत पोल बह गए।
कोटद्वार में मालन और खोह नदियों के साथ ही गिवई स्रोत व पनियाली गदेरे में कई विद्युत पोल बह गए। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण पेड़ टूटने से भी कई जगह विद्युत लाइनें व पोल टूटे। कुछ जगह ट्रांसफार्मर भी खराब हुए।
नुकसान के आकलन की प्रक्रिया अभी भी है जारी
कोटद्वार खंड की अधिशासी अभियंता नंदिता अग्रवाल ने बताया कि भारी वर्षा से हुए नुकसान के आकलन की प्रक्रिया अभी जारी है। अभी तक करीब तीन करोड़ के नुकसान का आंकलन कर लिया गया है। आकलन के बाद जरूरत वाले स्थानों पर मरम्मत शुरू की जाएगी।
पिटकुल का टावर ढहा
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन आफ उत्तराखंड (पिटकुल) का एक टावर पहाड़ी से हुए भूस्खलन की जद में आ गया। मुजफ्फरनगर-विष्णुप्रयाग हाईटेंशन पावर लाइन का यह विद्युत टावर कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य पहाड़ी से हुए भूस्खलन की जद में आ गया। पिटकुल की ओर इस टावर के स्थान पर नए टावर का निर्माण किया जा रहा है। नए टावर के निर्माण में करीब 75 लाख का व्यय होना तय है।
