कांग्रेस की 23 अगस्त तक ‘महंगाई पर चर्चा’, 28 अगस्त को ‘मंहगाई पर हल्ला बोल’ महारैली – HSS News 24

कांग्रेस की 23 अगस्त तक ‘महंगाई पर चर्चा’, 28 अगस्त को ‘मंहगाई पर हल्ला बोल’ महारैली

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देहरादून, ब्यूरो। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 17 अगस्त से 23 अगस्त तक पूरे देशभर में आसमान छूती मंहगाई, बढ़ती बेरोजगारी एवं मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ ‘‘मंहगाई पर चर्चा’’ कार्यक्रम आयोजित करने के साथ ही 28 अगस्त को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘‘मंहगाई पर हल्ला बोल’’ महारैली का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष प्रशासन/संगठन मथुरादत्त जोशी ने बताया कि कांग्रेस पार्टी आगामी तीन दिन तक आसमान छूती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी एवं मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे देश में ‘‘मंहगाई पर चर्चा’’ कार्यक्रम आयोजित करेगी तथा 28 अगस्त को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में ‘‘मंहगाई पर हल्ला बोल’’ महारैली का आयोजन किया जायेगा।
मथुरादत्त जोशी ने कहा कि भाजपा के शासन में मंहगाई अपने चरम पर है। जरूरत की सभी चीजें फल, सब्जी, दालें दुगने दाम पर मिल रहे हैं। पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के बेतहाशा बढते दाम आम आदमी का जीना दूभर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकारें मंहगाई पर काबू पाने में असफल साबित हुई हैं। रसोई गैस सिलेण्डर के दाम इतने बढ चुके हैं कि गरीब आदमी के घर का चूल्हा बुझने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनावों से पहले अपनी सभी जनसभाओं में मंहगाई कम करने का ढिढोरा पीटते थे परन्तु उनके 8 साल के कार्यकाल में मंहगाई अपने चरम पर पहुंच गई है तथा आम आदमी उसके बोझ को सहन करने में असमर्थ हो गया है। भाजपा सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में वृद्धि कर अपने चहेते घरानों की जेब भरने के लिए आम आदमी की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
मथुरादत्त जोशी ने कहा कि इसी कार्यक्रम के तहत प्रदेश अध्यक्ष करण महरा के आह्रवान पर पूरे प्रदेश में जिला, महानगर, ब्लाक व नगर स्तर पर मुख्य सार्वजनिक स्थानों में चौपाल के माध्यम से ‘‘मंहगाई पर चर्चा’’ कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। कंाग्रेस पार्टी इन कार्यक्रमों के माध्यम से आसमान छूती मंहगाई से आम आदमी की पहुंच से दूर होती जरूरी सामान की कमीतों, सुरसा के मुंह की भांति बढ़ती बेरोजगारी तथा मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों को जनता के बीच ले जाने का काम करेगी तथा आम जनता से इन बिन्दुओं पर चर्चा करेगी। मथुरादत्त जोशी ने यह भी बताया कि दिनांक 28 अगस्त, 2022 को मंहगाई के खिलाफ नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में उत्तराखण्ड राज्य के सभी वरिष्ठ नेतागण, विधायक, पूर्व विधायक, विधानसभा प्रत्याशी, जिला व महानगर अध्यक्ष, अनुषांगिक संगठन, विभाग, प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी तथा बडी संख्या में कार्यकर्ता प्रतिभाग करेंगे।

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चहेतों के लिए अटेचमैन्ट का खेलए ई.एस.आई. ने सीएम के आदेशों को दिखाया ठेंगा

देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखन्ड के सभी सरकारी विभागों में कर्मचारियों की सम्बद्धता (अटैचमैन्ट) समाप्त करने के  मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामी के सराहनीय प्रयास को कुछ विभाग पलीता लगा रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमन्त्री ने सभी विभागों में सम्बद्ध कार्मिकों की तत्काल प्रभाव से सम्बद्धता समाप्त कर उनके मूल विभाग में वापस भेजे जाने के निर्देश दिये थें। स्वयं मुख्यमन्त्री ने सचिवालय व अपने आवास कार्यालय में तैनात कर्मचारियों की सम्बद्धता खत्म कर दी थी। सहकारिता, कृषि,परिवहन, शिक्षा व विधानसभा में भी सभी कार्मिकों का अटैचमैन्ट समाप्त कर उनके मूल तैनाती स्थल हेतु कार्यमुक्त कर दिया गया  था। सर्वप्रथम विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खन्डूरी ने भी पहल कर विस में तैनात उन सभी सम्बद्व कार्मिको को तत्काल प्रभाव से हटा दिया था। कृषि मन्त्री गणेश जोशी ने कृषि विभाग से अटैचमैन्ट सिस्टम को समाप्त कर ऐसे कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया था। इसके विपरीत निदेशालय राज्य कर्मचारी बीमा योजना देहरादून ने नियमों को दर किनार कर अपने चहेते चीफ फार्मेसिस्ट बरकत अली की सम्बद्धता समाप्त न कर उसें पुनः निदेशालय में समायोजित कर लिया है। जबकि अन्य सम्बद्ध कार्मिक अपने मूल तैनाती स्थान पर वापस चले गये। बताया जाता है कि सियासी रसूखों के चलते उक्त  चीफ फार्मेसिस्ट कई सालों से अपनी सुविधानुसार वर्ष 2016 से निदेशालय में सम्बद्ध रहकर कार्यरत है। जबकि उसका मूल तैनाती स्थल रूडकी स्थित भगवानपुर है। हैरानी की बात तो यह है कि निदेशालय में चीफ फार्मेसिस्ट का कोई अतिरिक्त पद भी रिक्त नही है। निदेशालय में पहले से ही दो अन्य चीफ फार्मेसिस्ट कार्यरत है। सवाल उठता है कि सीएम के निर्देश पर जब सभी विभागों में सम्बद्वता पर पूर्णरूप से प्रतिबन्ध लगा हुआ है तो निदेशालय राज्य कर्मचारी बीमा योजना  ने नियमों को ताक पर रखकर सम्बद्वता समाप्त करने की बजाय उक्त चीफ फार्मेसिस्ट बरकत अली को फिर से निदेशालय में तैनाती के आदेश क्यों जारी कर दिये। यह भी जानकारी मिली है कि ई0एस0आई में कर्मचारियों की कमी दर्शाकर अटैचमैन्ट का बहाना बनाया गया है। उक्त अटैचमैन्ट को लेकर चर्चा है  कि सेटिंग-गेटिंग का मोटा खेल खेला गया है। जबकि इस सम्बन्ध में श्रम विभाग के अनुसचिव देवेन्द्र सिंह चौहान ने विगत 18 अप्रैल 2022 को अपने पत्र संख्या 1/29785 /अ।।। -1-22-04( ईएसआई ) 2022 को राज्य कर्मवारी बीमा योजना के निदेशक को आदेशित किया था कि ऐसे सभी सम्बद्व कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से उनके मूल तैनाती कार्यस्थल हेतु कार्यमुक्त किया जाए। ईएसआई निदेशालय ने देर आये दुरस्त आये की नीति पर अमल करते हुए लगभग चार माह  के पश्चात अपने कार्यालय आदेश संख्या 151-2022-23/432 दिनांक 2 अगस्त 2022 को ईएसआई निदेशालय एवं औषधालयों में सम्बद्व समस्त कार्मिको की सम्बद्वता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश तो जारी कर दिया लेकिन अपने आदेश के कुछ ही दिनों बाद निदेशक ने निदेशालय से सम्बद्व एक चीफ फार्मेसिस्ट का अटेचमैन्ट खत्म न कर उसकी तैनाती निदेशालय में ही कर दी। इस सम्बन्ध में ईएसआई निदेशक का कहना है कि निदेशालय में कार्मिकों की कमी की वजह से ऐसा किया गया है। सूत्रों के हवाले से मिली खबरों के अनुसार यह सारा खेल श्रम सचिव के स्तर पर ही हुआ है। शासन का अनुमोदन लिये बगैर ही गुपचुप तरीके से सम्बद्व चीफ फार्मेसिस्ट के लिए पद सृजित कर दिया गया। इस मामले में ईएसआई के मुख्यचिकित्साधिकारी डा0 आकाश दीप के पास निदेशालय में अटैचमैन्ट किये गये चीफ फार्मेसिस्ट की तैनाती के बावत कोई लिखित आदेश तो नही पहुंचे लेकिन अपने उच्चअधिकारियों के मौखिकज आदेश पर उन्होंने चीफ फार्मेसिस्ट को ज्वाइनिंग करा दी । बहरहाल अन्य सम्बद्व कार्मिकों को हटाकर केवल एक व्यक्ति की खातिर नियमों की अवेहलना कर उसे सम्बद्ध किये जाने को लेकर निदेशालय के कर्मचारियों मे रोष है। वहीं निदेशालय मे चीफ फार्मेसिस्ट पद पर कार्यरत एक मात्र महिला शशि जोशी जिन्हें शासन ने सम्बद्व किया था उन्हें भी मूल तैनाती स्थल पर जाने के आदेश  दिये गये है। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग की यह दोहरी नीति गलत है। सवाल यह है कि मुख्यमन्त्री के आदेशों को ईएसआई क्यों ठेंगा दिखा रहा है। इस मामले में मुख्यमन्त्री से उम्मीद है कि ईएसआई मे मनमर्जी सें किये गये सम्बद्वता के मामले का संज्ञान लेते हुए उन अफसरों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे जो नियम विरूद्व सम्बद्धता को जायज ठहरा रहे है।

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