उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा सुरंग में 16 दिनों से 41 मजदूर फंसे हैं। सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चल रहा है। जल्द ही सफलता मिलने की संभावना है। वहीं, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ’52 मीटर तक ड्रिलिंग का काम पूरा हो चुका है। साथ ही 57 मीटर पर ब्रेकथ्रू मिल सकता है। कल से मैन्युअल ड्रिलिंग जारी है। मैन्यूअल ड्रिलिंग के लिए दिल्ली से एक्सपर्ट बुलाए गए हैं।’ बता दें कि 12 लोगों की ये टीम रैट माइनिंग तकनीक पर काम करती है।
सिल्क्यारा टनल में इस वक्त 41 मजदूर 60 मीटर की दूरी पर फंसे हैं। अमेरिकी ऑगर मशीन से 48 मीटर तक की खुदाई पूरी कर लगी गई थी। लेकिन जब 10-12 मीटर की ड्रिलिंग ही बाकी रह गई थी जब मशीन बीच में ही खराब हो गई। मशीन के हिस्सों को बाहर निकाल लिया गया है और जहां पर मशीन ने खुदाई छोड़ी थी वहीं से रैट होल माइनर्स ने खुदाई शुरू कर दी है। इसमें मैनुअली ड्रिलिंग की जाती है इसलिए इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन यह कारगर साबित हो सकती है। इस प्रक्रिया में होता क्या है कि संकीर्ण गड्ढों के जरिए माइनर्स कोयला निकालने के लिए जाते हैं। मेघायल में विशेष रूस से इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। माइनर्स रस्सियों और बांस के जरिए कोयले की परत तक पहुंचते हैं। रैट होल माइनिंग ज्यादातर संकीर्ण सुरंगों में की जाती है और माइनर्स हॉरिजोंटल सुरंगों में कई सैकड़ों फीट तक नीचे उतरते हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड सरकार के नोडल अधिकारी नीरज खैरवाल ने साफ किया कि साइट पर लाए गए लोग रैट होल माइनिंग नहीं थे, बल्कि तकनीक में विशेषज्ञ थे।
