देहरादून, ब्यूरो। विश्व जागृति मिशन के संस्थापक संत सुधांशु महाराज ने कहा है कि स्वर्ग और नरक हमारे भीतर हैं। भगवान ने हमें बुद्धि दी है कि हम दोनों में से किसका चुनाव करें। सकारात्मक भावना और सकारात्मक विचार के साथ नियम पूर्वक चलेंगे तो स्वर्ग का आनंद प्राप्त होगा। दशा ठीक करनी है तो अपनी दिशा को ठीक कर लो, दशा अपने आप ठीक हो जाएगी।
अपर तुनवाला आनंद देव लोक आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारम्भ देहरादून से करते हुए सुधांशु महाराज ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा रिश्ता गुरु का है। गुरु में हर रिश्ता समाहित है। सदगुरु हमें जीवन जीने की कला सिखाकर भगवान से मिलने का कार्य करते हैं। गुरु से बरकत, ग्रहों की अनुकूलता सब कुछ मिलता है जिससे हमारा कल्याण हो जाए। गुरुमंत्र की सिद्धि के लिए गुरु से साधना सीखनी चाहिए। आश्रम में पहुंचे अपार भक्त समूह को आध्यात्मिक ज्ञान देते हुए कहा कि घर में सुख से ज्यादा शांति जरूरी है। जीवन में शांति है तो सुख अपने आप आ जायेगा। प्रसन्न चित् व्यक्ति की बुद्धि स्थिर रहती है और बुद्धि अच्छे निर्णय लेने लगती है। खुशी तो सब चाहते हैं, लेकिन उसका मूल्य कोई नहीं चुकाना चाहता। दुख का जाप नहीं सुख को याद करेंगे तो दुख अपने आप भाग जायेगा। बुजुर्ग अपने भूतकाल को याद करके दुखी और युवा अपने भविष्य को लेकर दुखी होकर जीता है, लेकिन बच्चा अपने वर्तमान को लेकर खुश रहता है। इसलिए वर्तमान में जीना चाहिए।
इस अवसर पर प्रधान सुधीर शर्मा, मनोज शास्त्री, देव राज कटारिया, आचार्य कुलदीप पाण्डे, भूपेंद्र चड्डा, प्रेम भाटिया, अमर नाथ आहूजा, तेज कुमार, हरीश भट्ट, रमेश मेहता, रमेश थपलियाल, राजेंद्र सिंह सोलंकी, हरेंद्र सिंह पुंडीर, विजय खत्री, मगन सिंह पुंडीर, अश्वनी खुराना, किरण गेरा, सुधांशु पुंडीर, सचिन गौड़, ओम प्रकाश गुप्ता, गंभीर सिंह पंवार, सतीश गुप्ता, दीपक शर्मा, राज कुमार कश्यप, अश्वनी कंबोज, कैलाश चंद जायसवाल, अनीता अग्रवाल, सुषमा भाटिया, नीतू भट्ट, बीना शर्मा, रंजना खत्री, पूनम सोनी, रमेश वर्मा, कमला नवानी, सरला कश्यप, रमेश अरोड़ा, सुधांशु पुंडीर मौजूद रहे।