खुफिया विभाग (आईबी) के स्पेशल डायरेक्टर राहुल रसगोत्रा ने कहा कि आतंकियों की भर्ती के लिए सोशल मीडिया के चैट रूम का इस्तेमाल हो रहा है। आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने के लिए विदेशी ताकतें सोशल मीडिया को जरिया बना रही हैं।
रसगोत्रा ने यह बात एफआरआई में आयोजित 49वीं ऑल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस में ‘आंतरिक सुरक्षा और सोशल मीडिया की चुनौतियां’ विषय पर अपने संबोधन में रविवार को कही। उन्होंने कहा कि असामाजिक तत्व अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आतंकवादियों की भर्ती तक अब सीधे सोशल मीडिया चैट रूम में बैठकर हो रही है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल निर्धारित एजेंडा फैलाने के लिए किया जा रहा है, ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित की जा सके।
फैक्ट चेकिंग यूनिट बने उन्होंने कहा कि आज इन चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर ध्यान देना होगा। खासतौर पर सोशल मीडिया समूहों में सतर्क दृष्टि के साथ खुद को सक्रिय रखना होगा। पुलिस स्तर पर भी फैक्ट चेकिंग यूनिट बनाई जानी चाहिए, ताकि समय पर गलत सूचनाओं चिह्नित किया जा सके।
परमाणु खतरों को लेकर आगाह किया
साइबर क्राइम इनवेस्टीगेशन जम्मू-कश्मीर के एसएसपी संदीप चौधरी ने केमिकल, बॉयोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर खतरों को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा, इनके लिए पहले से तैयारी जरूरी है, क्योंकि इनका असर जितना खतरनाक होगा, उससे निपटना उतना ही चुनौतीपूर्ण होगा।
भीड़ नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय जरूरी
गांधीनगर के एनएफएसयू के सहायक प्रोफेसर स्वीकार लामा ने भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रभावी उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, भीड़ नियंत्रित करना मनोविज्ञान है। भीड़ की सामाजिक पहचान, प्रबंधन, प्रभावी वार्तालाप बेहद जरूरी है।
